आप पढो, लिखो, संगठन पैदा करो और संघर्ष करो–भीम सिंह

जगत का सामना कमल किशोर फरीदाबाद : – जून 1942 को बाबा साहब वायसराय की कार्यकारी कौंसिल में लेबर मैम्बर के रुप में चुने जाने के बाद, पुरे देश में उनके स्वागत के लिए सभाएं आयोजित की गई थी।
ऐसी ही स्वागत सभा 18 जुलाई 1942 को नागपुर में लगभग एक लाख लोगों ने मिलकर बाबा साहब का स्वागत किया।
जिसमें बाबा साहब ने दबे कुचले समुदाय को एक आदेश जारी किया था।
आप पढो, लिखो, संगठन पैदा करो और संघर्ष करो।

बाबा साहब का यही आदेश दलित आंदोलन का मूल मंत्र भी है।

1946 तक वायसराय की कार्यकारी कौंसिल रहते जो काम किये थे वो कुछ इस प्रकार है।

1.जब पुरी दुनिया का ध्यान दुसरे विश्व युद्ध टिका था, उस समय में भी बाबा साहब दलित समुदाय के रोजगार के लिए चिंतित थे। और बंम्बई के राज्यपाल से मिले और अछूतों की बटालियन स्थापित करने की मांग की।
जिससे महार बटालियन स्थापित हुई।

2.न्यूनतम मजदूरी अधिनियम बाबा साहब ने असैंबली में 1946 में पेश किया और पास करवाया।

3.बाबा साहब ने लेबर मैंबर रहते हुए पूरे देश में रोजगार कार्यालय स्थापित करवाए।

  1. बाबा साहब ने टे्ड यूनियन कानून में संशोधन करके सभी रजिस्टर्ड यूनियनों को मान्यता देना चालू करवाया।

5.मजदूरों के लिए बीमा योजना की शुरुआत करवाईं।

6.मजदूरो के लिए चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करवाईं।

7.स्त्री मजदूरों के लिए वेतन के साथ प्रसूति छुट्टियां दिलवाई।

8.काम करते हुए मजदूरों को चोट लगने, अंग कटने या मृत्यु होने पर उचित मुआवजा देने का कानून भी बाबा साहब ने पास करवाया।

9.अपनी मांगे मनवाने के लिए हड़ताल करने का अधिकार दिलवाया।

  1. सफाई कर्मचारी अपनी मांगे मनवाने के लिए हड़ताल पर जाना तो एक ओर यदि वे एक सप्ताह तक काम पर न आए, तो उन्हें 15 दिन के लिए जेल भेजा जाता था। दिल्ली नगरपालिका में भी ऐसा ही एक नियम था।
    बाबा साहब ने ऐसे काले कानून हमारे देश से समाप्त करवाए।

इसके बाद बाबा साहब ने इस देश का सबसे पवित्र ग्रंथ संविधान बनाया।
जिसकी शक्ति से इस देश की महिला शक्ति आजाद हुई।
दबा कुचला समुदाय आजाद हुआ।
इस देश का हर वह आजाद हुआ जिसे इससे पहले जीवन जीने की आज़ादी नहीं थी। जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

बाबा साहब अकेले इस देश के गुलामों की आज़ादी के लिए लड़ते रहे।

फिर भी सन 1952 में बाबा साहब इलेक्शन में हार गए थे।

आखिर क्यु……………?

डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने जब चुनाव लड़ा था उस समय वह हार गए थे क्योंकि उस समय बहुजन समाज 5000 सालों से दबा कुचला और गुलामी की जिल्लत की जिंदगी जी रहा था बहुजन समाज और वह मनु वादियों की रूढ़िवादी विचारधाराओं में 5000 साल से लीन था और उनकी मनु वादियों की रूढ़िवादी विचारधाराओं को सहता हुआ चला रहा था वह इतना पढ़ा लिखा नहीं था वह उस समय इतना शिक्षित नहीं था कि वह अपना अपने आपको नहीं पहचानता था कि मैं आज क्या हूं और हमारा अधिकार क्या है कानून क्या होता है उसको तो बस खेती समझ में आती थी और जो बता दे एक अनपढ़ आदमी को क्या महसूस होता है कि जो जिसको जो बता दे उसी को श्रद्धा पूर्वक स्वीकार कर लेता था क्योंकि वह उसके गुणों व्यवहार से परिचित नहीं था लेकिन आज दुर्भाग्य है कि लोग अपनी जेब भरने और अपना पेट भरने में लगे हैं कोई भी ऑफिसर बहुजन समाज का युवा और कोई भी मजदूर वर्ग कर्मचारी वर्ग बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का अनुयाई पूर्ण रूप से नहीं बन पाया कुछ बने भी हैं तो वह अपना असर नहीं दिखा पा रहे हैं इसलिए आज बहुजन समाज बहुत पीछे हैं आज भी आज जो अपने समाज के ही चमचो की मार झेल रहा है जो मनुवादी विचारधारा वाला समाज है राष्ट्र को बर्बाद करने वाला विचारधारा वाला समाज है वह सक्रिय हैं आज आरक्षण का लाभ तो कुछ लोगों ने लिया है लेकिन वह भी मनु वादियों के साथ हो लिए आज सभी क्षेत्रों में देश के सरकारी विभागों को बर्बाद कर दिया है ठेकेदारों का गुलाम बनाकर और देश का युवा चाहे वह किसी भी वर्ग का हो वह ठेकेदारों पर निरंतर गुलाम बनता जा रहा है ऐसे में उन युवाओं का भला करने वाला मात्र एक ही पार्टी है वह बीएसपी है और बीएसपी पार्टी आजकल चमचा के घेरे में आ गई है क्योंकि जो मनुवादी विचारधारा वाले लोग हैं जो राष्ट्र को बर्बाद करने वाले लोग हैं जो बेईमान और लुटेरे चंद पूंजी वादियों का साथ देने वाले लोगों की चमचागिरी करने में चंद पैसों के लालच में और छोटे-छोटे लालच में वह कर अपना अपने बच्चों का भविष्य और अपने देश को बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं आज देखा जाए तो निजी कंपनियों ने हमारे दूरसंचार विभाग हमारा पीडब्ल्यूडी विभाग शिक्षा विभाग स्वास्थ्य विभाग और हमारा जो पोस्ट ऑफिस विभाग बिल्कुल बर्बाद कर दिया जिसमें लाखों करोड़ों युवाओं को नौकरियां मिलती और देश मैं जो सरकारी विभागों से आमदनी होती उससे देश तरक्की करता लेकिन वह सब गति रुक गई है आज प्राइवेट फैक्ट्री वाले जो कपड़े और अन्य वस्तुएं बनाते हैं वह भी बहुत ही सदमे में आ गए हैं क्योंकि वह मोटा टैक्स देते थे और उनकी भी बिक्री या नहीं हो रही है क्योंकि पब्लिक के पास पैसा नहीं है पैसा ठेकेदारों और चंद पूंजीपति बेईमानों और नेताओं की विदेशी गोदामों में सड़ रहा है

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