कांस्टेबल “प्रवीण कुमार जाटव” की सुबह चौकी इंचार्ज ने खाना खाते वक़्त गोली मारकर हत्या कर दी

जगत का सामना कमल किशोर फरीदाबाद : – खबर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की टिकरी चौकी से जहाँ कांस्टेबल “प्रवीण कुमार जाटव” की सुबह चौकी इंचार्ज ने खाना खाते वक़्त गोली मारकर हत्या कर दी। यही नही मारने के बाद इसको आत्महत्या रूप देने की कोशिश की गयी। गोली मारने के बाद सिपाही को किसी ने अस्पताल में भर्ती नही किया बल्कि चौकी के उस रूम का दरवाजा भी बंद कर दिया। मौत की पूरी तसल्ली होने के बाद घर पर झूठी सूचना दी गयी कि प्रवीण कुमार ने आत्महत्या कर ली है।

इससे पहले कि पुलिस अपने प्लान में कामयाब होती, प्रवीण के परिवार ने रहस्य से पर्दा उठा दिया और कहा कि प्रवीण आत्महत्या नही कर सकता, वो शेरदिल इंसान था। उसकी हत्या की गई है। चौकी इंचार्ज उससे उसकी जाति और ईमानदारी की वजह से चिढ़ता था। उन्होंने बागपत एसपी के उस बयान को भी झूठा करार दिया है जिसमे उसने मृतक के गम्भीर बीमारी से परेशान होकर आत्महत्या करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि प्रवीण को कोई भी बीमारी नही थी, वह पूरी तरह से फिट था। आत्महत्या के सवाल पर उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी कनपटी पर एक गोली मारने के बाद दूसरी नही मार सकता।

दरअसल प्रवीण को उसकी ईमानदारी की सजा मिली है। पिछले दिनों छुट्टियों
दरअसल प्रवीण को उसकी ईमानदारी की सजा मिली है। पिछले दिनों छुट्टियों पर घर आकर उन्होंने बताया था कि एक दिन हमारी ड्यूटी चेकिंग पर लगी थी, तभी किसी मुखबिर की सूचना पर हमने बैरियर लगाकर कुछ बदमाशो को वाहन और कीमती हथियारों समेत पकड़ लिया। बाद में एस.ओ. और एस.आई. ने मिलकर इन बदमाशो से एक बड़ी रकम लेकर ऐसे ही छोड़ दिया और सभी कांस्टेबलों को 5–5 हजार रुपये दे दिए।

प्रवीण कुमार ने पैसा लेने के बजाय इन अधिकारियों की शिकायत उच्चाधिकारियों से कर दी। चौकी इंचार्ज और साथी स्टाफ तब से ही प्रवीण से रंजिश रखने लगा था। प्रवीण ने घरवालों और दोस्तों को ये भी बताया था कि तब से वे लोग उसे जातिगत और मानसिक रूप से परेशान किया करते थे। आखिरकार मौका पाकर आज प्रवीण को खाना खाते वक़्त चौकी इंचार्ज ने अपने रिवॉल्वर से कनपटी पे सटाकर दो गोलियाँ मार दी, स्टाफ ने डेढ़ घंटे रूम बन्द कर दिया और एस.पी. ने इस मर्डर को आत्महत्या बता दिया।

15% ब्राह्मण, ठाकुर, बनियों की सरकार में 85% ओबीसी, एस.सी./एस.टी. और मुस्लिम चुन-चुन कर मारे जा रहे हैं।

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